Monday, November 5, 2007

कुण्डलियाँ

नारी सी लगती नहीं, यह कैसे पहने वस्त्र
वसन श्लीलता के प्रतीक या कामदेव के शस्त्र
कामदेव के शस्त्र, गया लज्जा का गहना
इन वस्त्रों में तुम जोकर सी लगती बहना
कह अभिषेक कविराय, जी छोडो स्वेच्छाचारी
गौरवशाली थीं पुनि गौरव धारो नारी

अभिषेक जैन

1 comment:

Unknown said...
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